नूंह में दोनों पक्षों में झड़प के दौरान आगजनी की गई।
हरियाणा के नूंह जिले के फिरोजपुर झिरका में 2 पक्षों में हिंसक झड़प हो गई। इस दौरान छतों से पथराव हुआ, कांच की बोतलें फेंकी गईं। इसके साथ ही एक बाइक को आग के हवाले कर दिया गया। लोगों ने दुकानों में भी आग लगा दी। इसमें करीब 10 लोग घायल हुए हैं।
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सूचना मिलते ही फिरोजपुर झिरका थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मामले को संभालने की कोशिश की। इसके बाद भी मामला शांत नहीं हुआ, तो बड़ी संख्या में पुलिसबल मौके पर तैनात किया गया।
स्थिति को पूरी तरह काबू में लाने के लिए राजस्थान बॉर्डर के थाने से भी पुलिस की टीम बुलानी पड़ी। इसके बाद भी मौके पर माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है।
झड़प के PHOTOS…
झड़प के बाद सड़क पर पथराव करते लोग।
मामला भड़कने पर बच्चों ने छतों से पत्थर फेंके।
बीच सड़क पर बाइक जमा लोग और जलती बाइक।
झड़प के बाद दुकानों में आग लगा दी गई। आग बुझने के बाद उनसे उठता धुआं।
दुकानों में आग लगने के बाद उनसे धुआं उठता हुआ।
आग लगने के बाद बाइक पूरी तरह जल गई।
जानें क्यों हुआ विवाद…
सड़क पर खड़ी कार बनी विवाद की जड़ फिरोजपुर झिरका के गांव मुड़ाका में सोमवार की शाम माहौल उस वक्त बिगड़ गया, जब पास के गांव का युवक इसरा अपनी कार सड़क के बीच खड़ी कर उसमें कोल्ड ड्रिंक पी रहा था। गांव का ही समय सिंह बाइक से वहां पहुंचा और रास्ता साफ करने को कहा। कुछ ही पलों की बहस में माहौल तना-तनी वाला हो गया और इसरा ने कार से उतरकर कोल्ड ड्रिंक की बोतल समय के सिर पर दे मारी। बोतल के वार से समय का सिर फट गया और सड़क पर खून बहने लगा।
फावड़े से दूसरा हमला, भीड़ में फैला गुस्सा खून से लथपथ समय सिंह ने अपने भाई को मौके पर बुलाया, लेकिन हालात संभलने के बजाय और बिगड़ गए। इसरा ने समय के भाई पर फावड़े से हमला कर दिया, जिससे वह भी बुरी तरह घायल हो गया। घटना की खबर फैलते ही लोग इकट्ठा होने लगे, और भीड़ में गुस्सा तेजी से बढ़ने लगा।
झगड़े ने लिया सांप्रदायिक मोड़ गांव के सरपंच राम सिंह ने बताया है कि दोनों पक्षों के दो-दो लोग घायल पड़े थे और देखते ही देखते विवाद को हिंदू-मुस्लिम रंग देने की कोशिशें शुरू हो गईं। गांव के दोनों ओर के लोग घरों की छतों पर चढ़ गए और एक-दूसरे पर पथराव शुरू कर दिया। कांच की बोतलें भी हवा में उड़ने लगीं।
सड़क पर हर तरफ टूटे कांच और पत्थरों का ढेर लग गया, जबकि गांव में दहशत का माहौल बन गया। करीब 10 लोग इस हिंसा में घायल हो गए।
बाइक और दुकानों में आगजनी गुस्साई भीड़ इसरा के घर में घुस गई और उसकी बाइक बाहर लाकर सड़क पर आग के हवाले कर दी। जवाब में इसरा के पक्ष के लोगों ने हिंदू समुदाय की दुकानों में आग लगा दी। इससे आसपास के घरों में लोग खौफ से दरवाजे-खिड़कियां बंद करने लगे। आगजनी में हजारों रुपए का नुकसान हुआ।
झड़प के बाद मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात की गई है।
झड़प के बाद 5 थानों की पुलिस पहुंची करीब डेढ़ घंटे तक पथराव और आगजनी का सिलसिला चलता रहा। शुरू में स्थानीय पुलिस ने समझाने की कोशिश की, लेकिन भीड़ काबू में नहीं आई। हालात बिगड़ते देख पांच थानों की पुलिस मौके पर पहुंची।इसमें राजस्थान बॉर्डर के थाने की टीम भी शामिल थी। तब जाकर स्थिति पर काबू पाया गया और दोनों पक्षों को अलग किया गया। इसके बाद भी मौके पर स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। इस पर अभी पुलिस की ओर से कोई बयान जारी नहीं किया गया है।
झड़प में ये लोग घायल हुए झड़प में एक पक्ष के चुन्नीलाल, गोपाल, लेखराज, वीर सिंह, फूलचंद, हंसराज और दूसरे पक्ष के खुर्शीद, फरहान व शाहबाज घायल हुए। इनका इलाज फिरोजपुर झिरका के स्थानीय अस्पताल में चल रहा है। इनमें से कुछ की हालत गंभीर है।
मौके पर अब स्थिति पुलिस के नियंत्रण में है, लेकिन माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है।
नूंह में पहले भी हिंसा भड़क चुकी
- बृजमंडल यात्रा में दंगा भड़का था: इससे पहले भी नूंह में हिंसा भड़क चुकी है। 2023 में बृजमंडल यात्रा के दौरान दंगा भड़क गया था। इस दौरान 2 गुटों में हुए टकराव के बाद 3 दर्जन से ज्यादा गाड़ियों को आग लगा दी गई। पुलिस पर भी पथराव किया गया। उपद्रवियों ने नूंह के साइबर थाना पर भी हमला कर दिया। पथराव किया और बाहर खड़ी गाड़ियों में आग लगा दी।
- पुलिस को जान बचाकर भागना पड़ा: हंगामे को देख पुलिसकर्मियों को जान बचाकर भागना पड़ा। मेवात के कस्बे नगीना और फिरोजपुर झिरका में भी कई जगह आगजनी की गई। इससे पहले उपद्रवियों ने स्कूल बस में भी तोड़फोड़ की थी। बस को उपद्रवी लूट ले गए और थाने को तोड़ने के लिए उसकी दीवार में टक्कर मार दी।
- काली माता मंदिर में तोड़फोड़ हुई: नूंह में भड़की हिंसा की चिंगारी मंदिरों तक भी पहुंची। उपद्रवियों ने कई जगह मंदिरों में तोड़फोड़ करने के अलावा आगजनी की कोशिश की। नूंह सिटी में पलड़ी रोड श्मशान घाट के पास काली माता मंदिर में उपद्रवियों ने खूब तोड़फोड़ की। भीड़ इतनी बेकाबू थी कि उसने मंदिर के आसपास के घरों पर भी जमकर पत्थर बरसाए, ताकि वहां से कोई बाहर न निकल सके।
- 7 लोगों की हुई थी मौत: इस हिंसा के दौरान 7 लोगों की मौत हुई थी। इनमें 4 नूंह, 2 गुरुग्राम और 1 पानीपत जिले से था। वहीं, कई लोग घायल भी हुए थे। इस मामले में पुलिस ने अलग-अलग थानों में करीब 61 मुकदमे दर्ज किए थे। जिन मुकदमों में UAPA लगाया गया है, वह मुकदमे 2 होमगार्ड व एक बजरंग दल कार्यकर्ता की हत्या से जुड़ा हुआ है।
- इन लोगों के नाम सामने आए: इस हिंसा को भड़काने में हिंदू संगठन के नेता बिट्टू बजरंगी के अलावा 3 और बड़े नाम सामने आए थे। जिनमें मोनू मानेसर, अशोक बाबा और फिरोजपुर झिरका सीट से कांग्रेस विधायक मामन खान का नाम शामिल था। करीब 450 लोग गिरफ्तार किए गए। 17 लोगों को छोड़कर बाकी सभी को जमानत मिल गई। हालांकि, मोनू मानेसर नासिर-जुनैद हत्याकांड में अब भी जेल में है।
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