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ट्विशा शर्मा मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वत: संज्ञान, CJI की अगुवाई में सोमवार को सुनवाई – supreme court suo motu cognisance twisha sharma case hearing on may 25 lclcn

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के कटारा हिल्स से सामने आया ट्विशा शर्मा की मौत मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है. इस मामले की सुनवाई सोमवार को की जाएगी. सुप्रीम कोर्ट की ओर से मामले को गंभीरता से लेते हुए सुनवाई की तारीख तय की गई है. इस मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच करेगी. बेंच में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली भी शामिल रहेंगे.

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25 मई को होगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट की निर्धारित बेंच 25 मई को इस मामले पर सुनवाई करेगी. फिलहाल अदालत की ओर से मामले में स्वत: संज्ञान लेने के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर बनी हुई है.

इंडिया टुडे को उस नोट की जानकारी मिली है, जिसे सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने मुख्य न्यायाधीश के समक्ष स्वत: संज्ञान लेने की अनुमति के लिए रखा था. नोट में कहा गया है कि मीडिया रिपोर्ट्स और अन्य परिस्थितियों के आधार पर जांच के प्रभावित होने को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं.

नोट में यह भी उल्लेख किया गया है कि 33 वर्षीय कॉरपोरेट प्रोफेशनल और पूर्व अभिनेत्री ट्विशा शर्मा की 12 मई 2026 को भोपाल स्थित ससुराल में मौत हुई थी. मीडिया रिपोर्ट्स और बाद की घटनाओं के आधार पर यह धारणा बनाई जा रही है कि निष्पक्ष जांच कथित तौर पर न्यायिक प्रभाव के कारण प्रभावित हुई हो सकती है.

ससुराल पक्ष पर मानसिक प्रताड़ना और दहेज मांग के आरोप

सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री द्वारा रखे गए नोट में कहा गया है कि मृतका की सास एक रिटायर्ड जिला जज हैं, जिसके कारण संस्थागत स्तर पर मामले को दबाने के आरोप लगाए जा रहे हैं. नोट में मानसिक प्रताड़ना, दहेज से जुड़ी मांगों और कथित संस्थागत कवर-अप के आरोपों का भी उल्लेख किया गया है.

नोट में मुख्य न्यायाधीश से यह निर्देश मांगा गया था कि क्या इस मामले में जांच की निष्पक्षता और संस्थागत ईमानदारी से जुड़े मुद्दों पर स्वत: संज्ञान लिया जाए. साथ ही सुझाव दिया गया था कि यदि अनुमति दी जाती है तो मामले को “सुओ मोटू रिट पिटीशन (क्रिमिनल)” के रूप में दर्ज कर संवेदनशील मामलों में निष्पक्ष जांच की प्रक्रिया मजबूत करने के निर्देश दिए जाएं.

मृतका के परिवार ने मामले में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की है. परिवार ने यह आरोप भी लगाया है कि न्यायपालिका से ससुराल पक्ष के गहरे संबंध होने के कारण जांच प्रभावित हो सकती है.

हाईकोर्ट ने दूसरे पोस्टमार्टम के दिए थे निर्देश

मामले में मृतका के परिवार ने हाईकोर्ट का भी रुख किया था. हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की चिंताओं को गंभीरता से लेते हुए कहा था कि सभी संदेह दूर करने और आम लोगों का भरोसा बनाए रखने के लिए दूसरा पोस्टमार्टम जरूरी है.

इसके बाद अदालत ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक को स्वतंत्र विशेषज्ञों की टीम गठित कर भोपाल जाकर दूसरा पोस्टमार्टम करने के निर्देश दिए थे.

अब मुख्य न्यायाधीश द्वारा दोनों प्रार्थनाओं को मंजूरी दिए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट में स्वत: संज्ञान का मामला औपचारिक रूप से दर्ज हो चुका है और इस पर सोमवार को सुनवाई होगी.

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