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World News Updates; Trump Pakistan China

2 घंटे पहले

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एक कलाकार द्वारा बनाया गया चित्र, जिसमें दिखाया गया है कि वह जानवर कैसा दिखता होगा। (यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग)

करीब 30 करोड़ साल पुराने जिस फॉसिल को अब तक दुनिया का सबसे पुराना ऑक्टोपस माना जा रहा था, वह असल में ऑक्टोपस नहीं था। नई स्टडी में इस मान्यता को गलत साबित किया गया है।

ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग के वैज्ञानिकों ने आधुनिक तकनीकों की मदद से इस फॉसिल की दोबारा जांच की। स्टडी के प्रमुख लेखक थॉमस क्लेमेंट्स के मुताबिक, यह फॉसिल ऑक्टोपस का नहीं, बल्कि नॉटिलस से जुड़े एक समुद्री जीव नॉटिलॉइड का है।

यह फॉसिल साउथ अमेरिका के अमेजन क्षेत्र के मेजोन क्रीक इलाके में मिला था। पहले की तकनीकों से इसकी सही पहचान नहीं हो पाई थी, क्योंकि मरने के बाद यह जीव काफी सड़-गल गया था और इसकी बनावट ऑक्टोपस जैसी लगने लगी थी।

नई जांच में एडवांस एक्स-रे तकनीक का इस्तेमाल किया गया, जिससे चट्टान के अंदर छिपी संरचनाएं साफ नजर आईं। इस दौरान वैज्ञानिकों को दांत जैसी एक संरचना मिली, जो ऑक्टोपस में नहीं होती। यही सबसे अहम सबूत बना, जिससे साफ हुआ कि यह जीव ऑक्टोपस नहीं था।

अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें…

43 साल जेल में बिताने के बाद भारतीय मूल के शख्स को अमेरिका में रहने की मंजूरी

अमेरिका में 43 साल तक एक गलत मर्डर केस में सजा काट चुके भारतीय मूल के सुब्रमण्यम वेदम को अब वहां रहने की अनुमति मिल गई है।

उन्हें बिना पुख्ता सबूत के दोषी ठहराया गया था, लेकिन 2025 में कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया। हालांकि रिहाई के कुछ ही घंटों बाद इमिग्रेशन अधिकारियों ने उन्हें फिर हिरासत में ले लिया।

सरकार ने 1980 के दशक के एक छोटे ड्रग केस के आधार पर उन्हें भारत भेजने की कोशिश की, लेकिन उनकी बहन ने इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ी।

2026 में इमिग्रेशन बोर्ड ने मामला दोबारा सुना और 2 अप्रैल को जज ने फैसला दिया कि वे अमेरिका में रह सकते हैं। जज ने उनके अच्छे व्यवहार, पढ़ाई और सुधार की सराहना की। अब सरकार के पास 4 मई तक इस फैसले को चुनौती देने का मौका है।

क्या था मामला?

1980 में उनके दोस्त थॉमस किनसर की हत्या हुई थी। वे आखिरी व्यक्ति थे जिन्होंने उन्हें जिंदा देखा था, इसी आधार पर 1982 में गिरफ्तारी हुई। केस में न कोई ठोस सबूत था, न हथियार और न गवाह, फिर भी 1983 में उन्हें उम्रकैद की सजा दे दी गई। पूरी खबर पढ़ें..

ट्रम्प बोले- ग्रीनलैंड बेकार बर्फ का टुकड़ा, ग्रीनलैंड के पीएम ने दिया जवाब

ईरान युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर ग्रीनलैंड को लेकर विवादित बयान दिया और यूरोपीय सहयोगियों पर नाराजगी जताई।

ट्रम्प ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि नाटो मुश्किल समय में अमेरिका के साथ नहीं था और आगे भी भरोसेमंद नहीं रहेगा। उन्होंने ग्रीनलैंड को एक बेकार का बर्फ का टुकड़ा बताया।

ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नीलसन ने इसका जवाब देते हुए कहा कि ग्रीनलैंड कोई बर्फ का टुकड़ा नहीं, बल्कि 57 हजार लोगों का समाज है जो अंतरराष्ट्रीय सहयोग और नियमों का सम्मान करता है।

उन्होंने यह भी कहा कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद जो वैश्विक व्यवस्था बनी, उसे बनाए रखना जरूरी है और सभी सहयोगियों को मिलकर काम करना चाहिए।

ट्रम्प की पत्नी मेलानिया बोलीं- मेरा यौन अपराधी एपस्टीन से कोई रिश्ता नहीं था

अमेरिका की फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रम्प के एक बयान ने अचानक हलचल बढ़ा दी है। उन्होंने साफ कहा है कि उनका कुख्यात यौन अपराधी जैफ्री एपस्टीन से कभी कोई रिश्ता नहीं रहा।

मेलानिया ने कहा, “मैं कभी भी एपस्टीन की दोस्त नहीं रही। मैं कभी उसके प्लेन में नहीं बैठी और न ही उसके प्राइवेट आइलैंड पर गई।”

उन्होंने यह भी साफ किया कि उनकी मुलाकात डोनाल्ड ट्रम्प से एपस्टीन के जरिए नहीं हुई थी। उनके मुताबिक, अगर कभी मुलाकात हुई भी तो बस कुछ सामाजिक कार्यक्रमों में ही हुई थी।

असल में, जैफ्री एपस्टीन एक बड़ा कारोबारी था, जिस पर नाबालिग लड़कियों के शोषण जैसे गंभीर आरोप लगे थे। 2019 में जेल में उसकी मौत हो गई थी, लेकिन आज भी उसका मामला काफी विवादों में रहता है और कई बड़े नाम इससे जुड़ते रहे हैं।

मेलानिया का यह बयान इसलिए चर्चा में है क्योंकि हाल में ऐसा कोई मुद्दा सामने नहीं आया था, फिर भी उन्होंने खुद सामने आकर सफाई दी। इससे सवाल उठ रहे हैं कि आखिर उन्होंने अभी यह बात क्यों कही।

खुद डोनाल्ड ट्रम्प ने भी कहा कि उन्हें इस बयान की पहले से कोई जानकारी नहीं थी। जानकारों का मानना है कि हो सकता है आगे किसी तरह का खुलासा होने वाला हो, उससे पहले ही मेलानिया ने अपनी स्थिति साफ कर दी हो।

वहीं कुछ लोग इसे इस तरह भी देख रहे हैं कि मौजूदा बड़े अंतरराष्ट्रीय मुद्दों से ध्यान हटाने की कोशिश हो सकती है।

ईरान जंग के बीच 10 साल बाद मिले चीन-ताइवान के नेता, जिनपिंग बोले- ताइवान की आजादी का विरोध हो

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ताइवान की मुख्य विपक्षी पार्टी KMT की नेता चेंग ली-वुन से मुलाकात की। वह 10 साल में चीन जाने वाली KMT की पहली मौजूदा नेता हैं।

2016 में चीन ने ताइवान से उच्च स्तर की बातचीत बंद कर दी थी, क्योंकि DPP की नेता त्साई इंग-वेन ने “एक चीन” नीति को नहीं माना था।

शी जिनपिंग ने कहा कि यह मुलाकात शांति, स्थिरता और बेहतर रिश्तों के लिए है। उन्होंने साफ किया कि बातचीत तभी होगी जब ताइवान की आजादी का विरोध किया जाए।

चेंग ने कहा कि “1992 कंसेंसस” और ताइवान की आजादी का विरोध ही युद्ध से बचने और शांति बनाए रखने का रास्ता है। यह कंसेंसस “एक चीन” को मानता है, लेकिन उसकी अलग-अलग व्याख्या की अनुमति देता है। DPP इसे खारिज करती है और इसे ताइवान की संप्रभुता के खिलाफ मानती है।

चीन ने ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते से बातचीत से इनकार करते हुए उन्हें अलगाववादी बताया है। वहीं ताइवान के ज्यादातर लोग मौजूदा स्थिति बनाए रखना चाहते हैं। न चीन में शामिल होना, न ही औपचारिक आजादी घोषित करना।

हंगरी प्रधानमंत्री के समर्थन में आए डोनाल्ड ट्रम्प, जनता से कहा- उन्हें चुनाव में फिर से जिताएं

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बान को चुनाव से पहले खुलकर समर्थन दिया है। उन्होंने वोटर्स से अपील की है कि वे ओर्बान को फिर से सत्ता में लाएं।

ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ओर्बान को मजबूत और प्रभावशाली नेता बताया। उन्होंने कहा कि ओर्बान ने देश के हितों की रक्षा करते हुए कानून-व्यवस्था को मजबूत रखा है। उन्होंने यह भी कहा कि ओर्बान के कार्यकाल में अमेरिका और हंगरी के रिश्ते नई ऊंचाई पर पहुंचे।

ट्रम्प इससे पहले 2022 के चुनाव में भी ओर्बान का समर्थन कर चुके हैं। हंगरी में 12 अप्रैल को चुनाव होने हैं। ऐसे में ट्रम्प का यह बयान चुनावी माहौल में अहम माना जा रहा है।

हंगरी में प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बान का मुकाबला आमतौर पर विपक्षी गठबंधन से होता है, लेकिन इस बार मुकाबला एकजुट विपक्ष के बजाय अलग-अलग पार्टियों के बीच ज्यादा बंटा हुआ है।

हाल के समय में पीटर माज्यार को ओबॉर्न के खिलाफ बड़ा चैलेंजर माना जा रहा है। वे पहले ओर्बान की पार्टी फिदेस से जुड़े थे। अब वे भ्रष्टाचार और सिस्टम के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।

प्रणय वर्मा बने बेल्जियम में भारत के नए राजदूत, EU में भी अहम भूमिका निभाएंगे

भारत ने सीनियर डिप्लोमैट प्रणय वर्मा को बेल्जियम में अपना नया राजदूत नियुक्त किया है। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को इसकी जानकारी दी। वे यूरोपियन यूनियन में भी भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे और जल्द ही अपना कार्यभार संभालेंगे।

प्रणय वर्मा इस समय बांग्लादेश में भारत के हाई कमिश्नर हैं। वे 1994 बैच के भारतीय विदेश सेवा (IFS) अधिकारी हैं और इससे पहले वियतनाम में भारत के राजदूत रह चुके हैं। उनके पास तीन दशक से ज्यादा का कूटनीतिक अनुभव है।

यह नियुक्ति ऐसे समय पर हुई है जब भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को लेकर तेजी से प्रगति हो रही है। इस समझौते के तहत 90 प्रतिशत से ज्यादा टैरिफ खत्म होने की संभावना है, जिससे दोनों पक्षों के बीच व्यापार को बड़ा बढ़ावा मिल सकता है।

माना जा रहा है कि इस समझौते को यूरोपियन संसद से मंजूरी दिलाने में प्रणय वर्मा की भूमिका अहम होगी।

इक्वाडोर ने कोलंबिया पर 100% टैरिफ लगाया, ड्रग तस्करी पर सख्ती न बरतने का आरोप

कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो (बाएं) और इक्वाडोर के राष्ट्रपति डैनियल नोबोआ (दाएं) – फाइल फोटो

इक्वाडोर ने कोलंबिया से आने वाले सामान पर 100% टैरिफ लगा दिया है, जो 1 मई से लागू होगा। इक्वाडोर के राष्ट्रपति डैनियल नोबोआ ने कहा कि कोलंबिया उनके देश में ड्रग तस्करी को रोकने के लिए ठोस कदम नहीं उठा रहा है, इस वजह से उन्हें यह सख्त कदम उठाना पड़ा।

कोलंबिया दुनिया के बड़े कोकीन उत्पादकों में से एक है। वहां से ड्रग्स इक्वाडोर के रास्ते बाहर भेजे जाते हैं। इक्वाडोर का कहना है कि इससे उसके देश में गैंगवार, हिंसा और अपराध बहुत बढ़ गए हैं। इसे लेकर दोनों देशों के रिश्तों में तनाव पिछले कई महीनों से बढ़ रहा था।

जनवरी में इक्वाडोर ने 30% टैरिफ लगाया था, जिसे मार्च में बढ़ाकर 50% कर दिया गया और अब इसे सीधे 100% तक पहुंचा दिया गया है।

कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे गलत कदम बताया और संकेत दिया कि कोलंबिया अब दूसरे देशों के साथ व्यापार बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।


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