Home / World / Hindi News / Pappu Yadav said – Giriraj Singh’s name will be Suar Singh from today | पप्पू यादव बोले-गिरिराज सिंह का नाम आज से सूअर सिंह: केंद्रीय मंत्री ने कहा था- सूअर पालूंगा, ताकि खास धर्म के लोग आसपास ना आ सकें – Bihar News

Pappu Yadav said – Giriraj Singh’s name will be Suar Singh from today | पप्पू यादव बोले-गिरिराज सिंह का नाम आज से सूअर सिंह: केंद्रीय मंत्री ने कहा था- सूअर पालूंगा, ताकि खास धर्म के लोग आसपास ना आ सकें – Bihar News

पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने बीजेपी सांसद गिरिराज सिंह की तुलना सूअर से की है। उन्होंने X पर लिखा, ”गिरिराज सिंह का नाम आज से सूअर सिंह किया जाता है। काम न धाम, बस कीचड़ में लोटना है इनका काम…का हो सूअर सिंह..।”

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दरअसल, एक दिन पहले बेगूसराय में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा था कि अब सूअर पालेंगे, जिससे कि एक खास धर्म के लोग उनके आसपास ना आ सकें। क्योंकि कुछ खास धर्म को मानने वाले लोग सूअर को अपवित्र मानते हैं।

गिरिराज सिंह ने यह बयान बेगूसराय के बछवाड़ा विधानसभा के नारेपुर हाई स्कूल कैंपस में NDA कार्यकर्ता सम्मेलन के दौरान दी थी।

जहां सूअर रहेगा, वहां इधर-उधर वाला आदमी नहीं आएगा-

गिरिराज सिंह ने कार्यक्रम में तंज कसते हुए कहा, ‘यहां के विधायक सुरेंद्र मेहता मछली, गाय, दूध के मंत्री बन गए हैं। हमने इनसे सूअर मांगा है। जहां सूअर रहेगा, वहां इधर-उधर वाला आदमी नहीं आएगा। अभी लोग विशेष अवसर पर ही धार्मिक किताब पढ़ते हैं। हमें चाहिए कि शास्त्र और शस्त्र की पूजा करें।’

उन्होंने आगे कहा, ‘दुर्गा मां के हाथ में भाला, तलवार और फरसा रहता है। सभी लोग अपने घर में शास्त्र और दुर्गा मां की ओर से अपने पास रखा जाने वाला शस्त्र जरूर रखें और उसकी पूजा करें। क्योंकि जब आप धर्म की रक्षा करेंगे, तभी धर्म भी आपकी रक्षा करेगा।’

गिरिराज ने कहा था- महागठबंधन में सब संतरे की तरह बंटे हैं

कुछ दिन पहले गिरिराज सिंह ने बेगूसराय में कहा था, ‘महागठबंधन है कहां? चुनाव के समय राहुल गांधी के आसपास सब सट जाते हैं, बाद में कोई नहीं रहता। सब संतरे की तरह बिखरे हुए हैं।’

वहीं, ममता बनर्जी को लेकर गिरिराज सिंह ने कहा था, “बंगाल का एक-एक व्यक्ति उन्हें संविधान विरोधी बता रहा है। आज तक कहीं देखा गया है कि कोई मुख्यमंत्री ED के हाथों से कागजात छीनकर बाहर आए और कहे कि ये गुप्त दस्तावेज थे। अगर गुप्त थे तो क्या वह पार्टी दफ्तर था?”


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