लखनऊ47 मिनट पहले
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लखनऊ हाईकोर्ट में राहुल गांधी की नागरिकता से जुड़ी याचिका पर सोमवार को सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति ए आर मसूदी और न्यायमूर्ति अजय कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने राज्य सरकार को चार सप्ताह में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। सरकार ने 8 सप्ताह का समय मांगा था। अगली सुनवाई 21 अप्रैल को होगी।
इससे पहले 19 दिसम्बर 2024 को कोर्ट में सुनवाई हुई थी। जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की बेंच ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) सूर्यभान पांडेय को इस मामले में केंद्रीय गृह मंत्रालय से जानकारी हासिल करने का निर्देश दिया था।
लखनऊ हाईकोर्ट में राहुल गांधी की नागरिकता से जुड़ी याचिका पर सोमवार को सुनवाई हुई।
गृह मंत्रालय ने यूके सरकार को पत्र लिखा
गृह मंत्रालय ने हाईकोर्ट में बताया था कि उन्होंने यूके सरकार को पत्र लिखा है। यूनियन ऑफ इंडिया की ओर से उपस्थित वकील ने कहा- समय दिया जाए। पूरे मामले में क्या जांच हो रही है। इसकी पूरी रिपोर्ट 8 सप्ताह में हम तैयार करके पेश करेंगे। कोर्ट ने समय दिया था।
याचिकाकर्ता का दावा- राहुल गांधी ब्रिटिश नागरिक हैं
याचिकाकर्ता कर्नाटक निवासी एस. विग्नेश शिशिर ने याचिका में दावा किया है कि राहुल गांधी ब्रिटिश नागरिक हैं। उनकी भारतीय नागरिकता रद्द की जानी चाहिए। उन्होंने ब्रिटिश सरकार के कुछ ईमेल और दस्तावेज जुटाए हैं। ये राहुल गांधी की कथित ब्रिटिश नागरिकता का सबूत हैं। कोर्ट आज इस पर फैसला सुना सकता है।
याचिकाकर्ता ने दावा किया-राहुल गांधी ब्रिटिश नागरिक हैं।
चुनाव लड़ने के अयोग्य
याचिका में कहा गया है कि दोहरी नागरिकता के कारण राहुल गांधी चुनाव लड़ने के अयोग्य हैं। वे लोकसभा सदस्य का पद नहीं धारण कर सकते। याचिकाकर्ता ने राहुल की सांसद पद पर बने रहने के खिलाफ अधिकार पृच्छा रिट जारी करने की मांग की है।
सीबीआई जांच की मांग
याचिका में दोहरी नागरिकता को भारतीय न्याय संहिता और पासपोर्ट एक्ट के तहत अपराध बताया गया है। इस मामले में सीबीआई जांच की मांग भी की गई है। याचिकाकर्ता ने बताया कि उन्होंने इस मामले में सक्षम प्राधिकारी को दो बार शिकायत भेजी। कोई कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने यह याचिका दाखिल की है।
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लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी लखनऊ की MP/MLA कोर्ट में नहीं पेश हुए। भारतीय सेना के खिलाफ टिप्पणी के मामले में 11 फरवरी को अदालत ने राहुल को समन भेजा था। जिसमें कहा था, राहुल गांधी के इस बयान को उनके संसदीय कर्तव्यों का हिस्सा नहीं माना जा सकता, इसलिए उन्हें कानून के तहत विशेष सुरक्षा नहीं मिलेगी। यहां पढ़े पूरी खबर
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