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36 साल जेल में बिताने के बाद रिहा हुए 104 साल के बुजुर्ग, जानें किस गुनाह में हुई थी ये सजा

Image Source : PIXABAY REPRESENTATIONAL
बुजुर्ग ने रिहा होने के बाद कहा कि वह बागवानी करना चाहते हैं।

कोलकाता/मालदा: पश्चिम बंगाल के मालदा सुधार गृह में 36 साल जेल में बिताने के बाद 104 साल के बुजुर्ग शख्स को रिहा कर दिया गया। अपनी रिहाई के बाद बुजुर्ग शख्स ने अपने दिल की बात बोल दी और कहा कि वह परिवार के साथ समय बिताने के साथ-साथ बागवानी करेंगे। रक्षित मंडल नाम के इस बुजुर्ग को 1988 में जमीन से जुड़े विवाद के एक केस में अपने भाई की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद 1992 में मालदा की जिला एवं सत्र अदालत ने उन्हें इस केस में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

मंडल ने अपनी उम्र 108 साल बताई, बेटे ने किया सुधार

रक्षित मंडल को लगभग एक साल के लिए जमानत पर रिहा किया गया था और दूसरी बार परोल दी गई थी, लेकिन परोल का टाइम खत्म होने के बाद वह फिर से जेल चले गए थे। मालदा जिले के मानिकचक के रहने वाले मंडल ने मंगलवार को मालदा सुधार गृह के गेट से बाहर निकलते हुए कहा कि अब वह अपना पूरा समय बागवानी और पौधों की देखभाल में लगाएंगे। उन्होंने कहा कि वह परिवार के सदस्यों के साथ भी वक्त बिताएंगे। जब मंडल से पूछा गया कि उनकी उम्र कितनी है तो उन्होंने 108 साल कहा, लेकिन उनके साथ आए उनके बेटे ने इसमें सुधार करते हुए उनकी उम्र 104 साल बताई।

‘बगीचे में पौधों की देखभाल में समय बिताना चाहता हूं’

सुधार गृह के अधिकारियों ने बताया कि रिकॉर्ड के मुताबिक मंडल की उम्र 104 साल है। अपनी उम्र के हिसाब से काफी चुस्त दिख रहे रक्षित मंडल ने कहा, ‘मुझे याद नहीं कि मैंने कितने साल जेल में बिताए। ऐसा लग रहा था कि यह कभी खत्म ही नहीं होगा। मुझे यह भी याद नहीं कि मुझे यहां कब लाया गया था। अब मैं बाहर आ गया हूं और अपने जुनून यानी अपने आंगन के छोटे से बगीचे में पौधों की देखभाल में समय बिताना चाहता हूं। मुझे अपने परिवार और पोते-पोतियों की याद आती थी। मैं उनके साथ रहना चाहता हूं।’ मंडल के बेटे प्रकाश मंडल ने कहा कि उनके पिता को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद रिहा कर दिया गया।

‘सुप्रीम कोर्ट ने उनकी रिहाई का रास्ता साफ किया’

प्रकाश मंडल ने कहा, ‘जेल में काफी वक्त बिताने के बाद हर कैदी को जेल से रिहा होने का अधिकार है, बशर्ते उसने सजा के दौरान कोई गलत काम न किया हो, यह बात हमें हमारे वकील ने बताई। हमें खुशी है कि सुप्रीम कोर्ट ने आखिरकार उनकी रिहाई का रास्ता साफ किया।’ साल 1992 में जिला एवं सत्र न्यायालय मालदा ने मंडल को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, उस समय उनकी आयु 72 वर्ष थी। हालांकि, कलकत्ता हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान उन्हें जमानत पर रिहा किया था। 

‘मैं बेगुनाह हूं और हालात का शिकार हुआ हूं’

बाद में निचली अदालत के आजीवन कारावास के फैसले को हाई कोर्ट द्वारा बरकरार रखने के बाद वह सुधार गृह वापस चले गए थे। साल 2020 में उन्हें परोल दी गई थी लेकिन 2021 में वह सुधार गृह वापस चले गए और पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट द्वारा आदेश जारी किए जाने तक जेल में रहे। उनकी 80 साल की पत्नी मीना मंडल ने कहा, ‘मैं बहुत खुश हूं।’ रक्षित मंडल ने दावा किया, ‘मैं बेगुनाह हूं और हालात का शिकार हुआ हूं।’ (भाषा)


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