Home / World / Hindi News / वक्फ बिल पर विपक्ष के पास अब 3 तीर… जो धारा 370, CAA पर नहीं हुआ वो अब हो पाएगा? – opposition has three arrows on Waqf Bill what could not happen on Article 370 CAA will it be possible to happen now ntc

वक्फ बिल पर विपक्ष के पास अब 3 तीर… जो धारा 370, CAA पर नहीं हुआ वो अब हो पाएगा? – opposition has three arrows on Waqf Bill what could not happen on Article 370 CAA will it be possible to happen now ntc

दो दिन के भीतर देर रात तक लगातार 12-12 घंटे से ज्यादा की चर्चा करके संसद के दोनों सदनों से वक्फ संशोधन बिल पास हो चुका है. हालांकि अब इसे रोकने की कोशिशें शुरू हो सकती हैं. तमाम मुस्लिम संगठनों समेत विपक्ष इसका लगातार विरोध कर रहे है. ऐसे में इनके सामने अब तीन प्रमुख विकल्प बचे हैं. वो हैं- अदालत का सहारा, सड़कों पर आंदोलन और राजनीतिक दबाव. अब सवाल यह है कि क्या इस बिल को अदालत में चुनौती देकर रोका जा सकता है या सड़क पर विरोध प्रदर्शन से सरकार को झुकाया जा सकता है? इन सवालों के अलावा बिहार चुनाव को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या नीतीश कुमार की पार्टी के मुस्लिम नेताओं की नाराजगी विपक्ष के लिए संजीवनी बनेगी? 

दरअसल, अदालत, आंदोलन और अंदरूनी दबाव… यही अब वो तीन तीर बचे हैं, जिनसे देश में संसद से पास वक्फ बिल को रोकने की राह पर विपक्षी दल और मुस्लिम संगठन चल पड़े हैं. शुरुआत कांग्रेस और असदुद्दीन ओवैसी की तरफ से हुई है. बिहार में किशनगंज से कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद और AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सुप्रीम कोर्ट में वक्फ बिल के खिलाफ याचिका दायर की है. जो बिल लोकसभा में विरोध के 232 के मुकाबले 288 वोट और राज्यसभा में विपक्ष के 98 के मुकाबले 128 वोट से पास हुआ है, उसे रोकने के लिए औवैसी और कांग्रेस के सांसद ने सुप्रीम कोर्ट से ये दलील देते हुए याचिका दायर की है कि ये बिल संविधान के बुनियादी सिद्धांतों और नागरिक अधिकारों के खिलाफ है. 

सुप्रीम कोर्ट से कितनी मिलेगी राहत?

अब सवाल ये है कि जो बिल राष्ट्रपति के दस्तखत के साथ कानून बन जाएगा, उसे विपक्ष अदालत से रोक सकता है? इसी तरह राम मंदिर से लेकर, जम्मू कश्मीर में धारा 370 की आजादी और नागरिकता संशोधन कानून खिलाफ भी विपक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कीं, लेकिन हर बार विपक्ष को झटका ही लगा. तब क्या सुप्रीम कोर्ट जाने की वजह मुस्लिम वोट है, ताकि दिखाया जा सके कि लड़ाई लड़ी गई? साथ ही यह भी सवाल है कि अदालत के साथ ही वक्फ बिल रोकने की तैयारी आंदोलन से है? लुधियाना में पुतला जलाकर प्रदर्शन किया गया. वक्फ बिल के खिलाफ नारेबाजी हुई. कोलकाता में सैकड़ों लोग सड़क पर वक्फ बिल के खिलाफ प्रदर्शन करने उतरे. इसी प्रदर्शन की आहट को भांपकर उत्तर प्रदेश के तमाम शहरों में संवेदनशील जगहों पर लगातार हाई अलर्ट पर पुलिस रही. लेकिन यूपी में कहीं कोई बड़ा प्रदर्शन नहीं दिखा

अदालत और आंदोलन के साथ ही विपक्ष का तीसरा दांव नीतीश कुमार की पार्टी पर अब भी अंदरूनी दबाव बनाने की सियासत से जुड़ा है. वजह ये है कि विपक्ष को लगता है कि 240 सीट वाली बीजेपी अपने दम पर बिल पास नहीं करा सकती थी. अगर नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू की पार्टी समर्थन ना करती. अब विपक्ष के कई नेता ये दावा करते हैं कि 24 घंटे के भीतर कुछ मुस्लिम नेताओं ने जो जेडीयू का साथ छोड़ा या फिर सवाल उठाया, उससे नीतीश कुमार दबाव में आ सकते हैं. वहीं जेडीयू ने साफ कर दिया वो वक्फ बिल पर आगे भी बीजेपी के साथ खड़ी है. 

जेडीयू के इन पांच नेताओं ने छोड़ी पार्टी

नीतीश कुमार की पार्टी के संसद में बिल के समर्थन में खड़े होने से कुछ मुस्लिम नेताओं ने पहले इस्तीफा दिया. फिर जेडीयू के ही कुछ मुस्लिम नेताओं ने बिल को वापस करने की मांग उठाई, वहीं मुस्लिम धर्मगुरु कहने लगे कि नीतीश कुमार ने धोखा दिया है तो अब मुस्लिम वोटर सबक सिखाएंगे. इन सबके जवाब में जेडीयू का कहना है कि जिन्होंने पार्टी छोड़ी है, उन्हें कोई नहीं जानता है. दावा ये किया कि पसमांदा मुस्लिम पार्टी के साथ खड़े हैं. इस बीच सवाल ये भी उठ रहा है कि नीतीश कुमार जो पिछले 20 साल में गठबंधन वक्त से पहले बदलकर सत्ता हाथ में लिए हुए हैं, क्या उन्हें अंदाजा नहीं होगा कि वक्फ बिल पर मुस्लिम नाराज हैं या नहीं. जेडीयू के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश सचिव मोहम्मद शाहनवाज मलिक, प्रदेश महासचिव मो. तबरेज सिद्दीकी अलीग, भोजपुर के पार्टी सदस्य मो. दिलशान राईन, पूर्व प्रत्याशी मोहम्मद कासिम अंसारी और पूर्व युवा जेडीयू प्रदेश उपाध्यक्ष तबरेज हसन ने पार्टी के वक्फ बिल वाले स्टैंड को लेकर अपनी लाइन बदल ली इस्तीफा दिया. अब जेडीयू कहती है कि इस्तीफा देने वालों को जानता ही कौन है? 

मुस्लिम नेता नीतीश कुमार पर बना पाएंगे दबाव?

इस सियासत को इतने भर से भी समझा जा सकता है कि फिलहाल डैमेज कंट्रोल के लिए अब जेडीयू के मुस्लिम नेता खुद ही शनिवार प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले हैं. असल में बिहार में मुस्लिम वोट का बड़ा हिस्सा पाने वाली आरजेडी को लगता है कि ये मौका है. जहां नीतीश का बचा हुआ मुस्लिम वोट छीना जा सकता है. इसीलिए संघ गणवेश में नीतीश की तस्वीर बनाकर उस पर चीटीश कुमार लिखकर मुस्लिमों से धोखे का सियासी वार किया गया. और फिर ये तक दावा कर दिया कि नीतीश बीमार हैं, तभी समर्थन बिल का किया है. अचानक से पूरे विपक्ष को लगता है कि नीतीश कुमार पर उन्हीं के मुस्लिम नेताओं का दबाव बनाकर या तो अंतरात्मा जगवाई जाए या फिर जेडीयू का मुस्लिम वोट खीचं लिया जाए, लेकिन नीतीश कुमार की कैलकुलेशन का अंदाजा शायद विपक्ष को अभी नहीं है.

नीतीश कुमार अपना एक एक कदम राजनीति में गिनकर उठाते हैं. क्या मुस्लिम वोट की नाराजगी भी नीतीश पहले कैलकुलेट कर चुके थे? वजह ऐसे समझी जा सकती है कि बिहार में कुल मुस्लिम 17.7% हैं, जबकि राज्य में पसमांदा मुस्लिम 12.9% हैं. मुस्लिम आबादी में पसमांदा की संख्या 73% है. नीतीश कुमार को लगता है कि पसमांदा समाज उनके साथ आएगा. दूसरी वजह ये है कि 2020 विधानसभा चुनाव के नतीजे देखे जाएं तो 20% से ज्यादा मुस्लिम वोट वाली कुल 47 विधानसभा सीट बिहार में हैं. जिनमें 2020 में एनडीए ने 23 सीट जीती, महागठबंधन को बड़ा मुस्लिम वोट मिला तब भी उसकी सीट NDA से कम रही. यहां नीतीश की कैलकुलेशन ये मानी जा रही है कि मुस्लिम वोट बंटने से फायदा NDA का ही होगा.


Source link

Check Also

Europe Heatwave 2026 Crisis Alert; France Alcohol Ban

Hindi News International Europe Heatwave 2026 Crisis Alert; France Alcohol Ban | Italy Spain UK …