कई देशों के आंकड़े भी कुछ इसी ओर इशारा करते हैं कि कोरोना वायरस महिलाओं और पुरुषों में भेद करता है.

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मुंबई: कोविड-19 की महामारी मर्दों और औरतों पर अलग-अलग तरह से प्रभाव डाल रही है. मुंबई के सरकारी आंकड़े ये साबित करते हैं कि ये बीमारी लिंग भेद करती है. मुंबई में पुरुष रोगियों की तुलना में महिला रोगियों की संख्या कम है. मरनेवालों में पुरुष ज़्यादा है. बीएमसी और डॉक्टर इसकी वजह बता रहे हैं. मुंबई में कोरोना संक्रमित मरीज़ों के आंकड़ों पर नजर डालें तो इनमें पुरुष – 55% और महिलाएं – 45% हैं. शहर में अब तक के संक्रमितों की संख्या में पुरुष रोगियों की तुलना में महिला रोगियों की संख्या कम है. मौत के आंकड़े देखें तो महिलाओं की डेथ रेट जहां 35% है, वहीं पुरुषों की डेथ रेट है 65% है.
हाल ही में हुए सेरो सर्वे में पाया गया की मुंबई में, पुरुषों की तुलना में महिलाओं में कोरोना के मुकाबले अधिक एंटीबॉडी हैं. मुंबई में, 59 प्रतिशत महिलाओं ने कोरोना वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी विकसित की है. पुरुषों में ये आंकड़ा 53 फीसदी है, विशेष रूप से स्लम क्षेत्रों में महिलाओं में एंटीबॉडी का अनुपात सबसे अधिक है. बीएमसी के एडिशनल म्यूनिसिपल कमिश्नर सुरेश ककानी, महिलाओं में एस्ट्रोजन हार्मोन की उपस्थिति को इसकी वजह बताई.
महिलाओं में ज़्यादा इम्यूनिटी
वहीं आयुष हॉस्पिटल के डॉ सुहास देसाई भी मानते हैं की महिलाएं कोरोनावायरस संक्रमण से कम लक्षण विकसित करती हैं और पुरुषों की तुलना में इसके खिलाफ भी जल्दी ठीक हो जाती हैं.
उन्होंने कहा, “महिलाओं में ज़्यादा इम्यूनिटी, फ़ैक्टर ये है की उनमें एक्स्टर एक्स क्रोमोज़ोम…महिलाओं मे पाया जाने वाला सेक्स हार्मोन एस्ट्रोजन भी इम्यूनिटी को बनाए रखता है. एक्स क्रोमोसोम को भी इम्यूनिटी जीन माना जाता है, जो कि महिलाओं में दो जबकि पुरुषों में सिर्फ एक होता है. कुछ इसी लाइन पर है.”
बीपी और हार्ट की बीमारी और शराब-सिगरेट भी एक कारण!
महिलाओं की तुलना में पुरुषों में बहुत कम उम्र में ही दिल संबंधी और हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियां हो जाती हैं और ये किसी भी गंभीर बीमारी की संभावना को और बढ़ा देती हैं. पुरुषों में स्मोकिंग या ई-सिगरेट की ज़्यादा लत भी कोरोना वायरस के संक्रमण को और खतरनाक बनाता है.
बांद्रा भाभा हॉस्पिटल के कोविड इंचार्ज डॉ अमय पाटिल बताते हैं पुरुषों का स्वास्थ्य और व्यवहार भी उनकी कमजोरी में एक अहम भूमिका निभाता है.
उन्होंने बताया, “मेल में सोशल डिसटेंसिंग नहीं, ये घर से ज़्यादा निकलते हैं, प्रदूषण के बीच में हैं. पुरुषों में स्मोकिंग की आदत ज़्यादा है, शराब की लत, तो ये लाइफ़स्टाइल भी दिक़्क़त देती है.”
लाइफस्टाइल है कमजोरी की वजह!
कई देशों के आंकड़े भी कुछ इसी ओर इशारा करते हैं कि कोरोना वायरस महिलाओं और पुरुषों में भेद करता है, रिसर्चरों की टीम इसकी वजह तलाशने में जुटी. अभी तक कोई सटीक कारण सामने नहीं आ सका है. पर मोटे तौर पर वैज्ञानिक, पुरुषों के जीने के सलीक़े को ही उनकी कमजोरी की एक बड़ी वजह के तौर पर देख रहे हैं.
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