ऑस्ट्रेलिया ने कहा है कि इंडो-पैसिफ़िक क्षेत्र में अमरीका और चीन में बढ़ते तनाव के बीच वो अपने सैन्य ख़र्च में बड़ी बढ़ोत्तरी करेगा.

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने कहा है कि वो अगले 10 साल में सेना का बजट 270 अरब ऑस्ट्रेलियन डॉलर करेंगे. ये 40 फ़ीसदी की बढोत्तरी है.
उन्होंने कहा कि ये इसलिए ज़रूरी है क्योंकि ये क्षेत्र हमारे समय की प्रमुख वैश्विक प्रतियोगिता का केंद्र बन गया है.
ऑस्ट्रेलिया के पीएम ने तनाव के कई क्षेत्रों का ज़िक्र किया, जिनमें भारत और चीन के बीच सीमा विवाद, दक्षिणी चीन सागर और पूर्वी चीन सागर शामिल हैं.
भारत और चीन के सैनिकों के बीच गलवान में हुए संघर्ष में 20 भारतीय सैनिक मारे गए थे. इसके बाद से ही दोनों देशों के बीच सीमा पर तनाव बना हुआ है.
हाल के दिनों में चीन और ऑस्ट्रेलिया के रिश्ते भी काफ़ी बिगड़े हैं और ऐसा दशकों में पहली बार हुआ है.
पिछले दिनों अमरीकी विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने भी कहा था कि चीन से भारत और दक्षिण-पूर्वी एशिया में बढ़ते ख़तरों को देखते हुए अमरीका ने यूरोप से अपनी सेना की संख्या कम करने का फ़ैसला किया है.
नया रक्षा बजट सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का दो प्रतिशत होगा. ये बजट 2016 में बनाई गई नई रणनीति की जगह लेगा. 2016 में रक्षा बजट के लिए 195 अरब ऑस्ट्रेलियन डॉलर रखा गया था.
पीएम मॉरिसन का कहना है कि ज़्यादातर ख़र्च हथियारों और उपकरणों के सुधार में किया जाएगा.
ऑस्ट्रेलिया अमरीकी नौसेना से लंबी दूरी की 200 जहाज़रोधी मिसाइलें ख़रीदेगा, जो 370 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकती हैं. साथ ही हाइपरसोनिक हथियार सिस्टम मिसाइल विकसित करने में भी ऑस्ट्रेलिया निवेश करेगा. ये मिसाइलें भी हज़ारों किलोमीटर की दूरी तय कर सकती हैं.
साइबर वॉरफ़ेयर के लिए ऑस्ट्रेलिया 15 अरब ऑस्ट्रेलियन डॉलर ख़र्च करेगा. पिछले महीने ही पीएम स्कॉट मॉरिसन ने चेतावनी दी थी कि ऑस्ट्रेलियाई संस्थानों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर साइबर अटैक का ख़तरा है. माना गया कि उनका इशारा चीन की ओर था.
पीएम स्कॉट मॉरिसन का कहना है कि हाल के वर्षों में अमरीका और चीन के बीच तनाव बढ़ा है. कोरोना महामारी के कारण तनाव और बदतर हुआ है. इस कारण दशकों बाद अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था सबसे अस्थिर दौर में है.
उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में अप्रत्याशित रूप से सैन्य आधुनिकीकरण की गति तेज़ हुई है.
स्कॉट मॉरिसन ने कहा, “बर्लिन की दीवार गिरने से लेकर वैश्विक वित्तीय संकट तक ऑस्ट्रेलिया ने आम तौर पर एक बेहतर सुरक्षा का मौहाल देखा है, लेकिन अब स्थिति वैसी नहीं रही. ग़लत अनुमान और यहाँ तक कि संघर्ष का ख़तरा बढ़ रहा है.”
उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया अपने और क्षेत्र के दूसरे देशों के लोकतांत्रिक मूल्यों का पूरी ताक़त के साथ बचाव करेगा. उन्होंने ये भी कहा कि सैनिक क्षमता बढ़ाने से युद्ध को रोकने में मदद मिलेगी.
2016 की रणनीति के मुताबिक़ ऑस्ट्रेलिया की सैन्य प्राथमिकताएँ पूरे क्षेत्र में बराबर बाँट दी गई थी, साथ ही मध्य पूर्व में अमरीका के नेतृत्व वाले मिशन जैसे पश्चिमी देशों के गठबंधन में भी इसे शामिल किया गया था.
विपक्षी लेबर पार्टी ने रणनीति में बदलाव का स्वागत किया है. पार्टी का कहना है कि क्षेत्र में व्यापक रूप से सैन्य मामलों में ध्यान केंद्रित करने की मांग काफ़ी समय से हो रही थी.
विश्लेषकों का कहना है कि रणनीति में बदलाव का मतल ये है कि ऑस्ट्रेलिया इस क्षेत्र में अपने संसाधनों के बलबूते मज़बूत बनना चाहता है.
कई जानकार इस इलाक़े में चीन के बढ़ते प्रभाव से भी इसे जोड़कर देख रहे हैं.
हाल के दिनों में चीन और ऑस्ट्रेलिया के रिश्ते में काफ़ी कड़वाहट आई है ख़ासकर उस समय से जब ऑस्ट्रेलिया ने कोरोना वायरस की चीन में उत्पति की जाँच की मांग की थी.
News Credit बीबीसी
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