Home / World / Hindi News / पहाड़ी इलाकों के लिए तैयार किया गया टैंक 'जोरावर':25 टन वजन है; साल 2027 तक इंडियन आर्मी में शामिल किया जा सकता है

पहाड़ी इलाकों के लिए तैयार किया गया टैंक 'जोरावर':25 टन वजन है; साल 2027 तक इंडियन आर्मी में शामिल किया जा सकता है



रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ( DRDO) ने शनिवार (6 जुलाई) को गुजरात के सूरत में स्वदेशी लाइट टैंक ‘जोरावर’ का सफल परीक्षण किया। DRDO ने इसे लार्सन एंड टुब्रो (LT) के साथ मिलकर तैयार किया है। सूरत के हजीरा में LT के प्लांट में जोरावर की टेस्टिंग के दौरान DRDO के चीफ समीर वी कामथ मौजूद रहें। उन्होंने कहा कि टैंक को सारी टेस्टिंग के बाद साल 2027 तक इंडियन आर्मी में शामिल किए जाने की उम्मीद है। शुरुआत में सेना को 59 टैंक दिए जाएंगे। इनकी संख्या 295 तक ले जाने की प्लानिंग है। लाइट वेट जोरावर टैंक को लद्दाख जैसे हाई एल्टिट्यूड वाले इलाकों में तैनात किया जाएगा। रूस और यूक्रेन युद्ध से सबक लेते हुए टैंक में लोइटरिंग म्यूनिशन यूएसवी जोड़ा गया है। माना जा जोरावर को चीन के कम वजन के टैंक ZTQ टाइप-15 के मुकाबले के लिए तैयार किया गया है। गलवान घाटी में भारतीय सेना से हुई झड़प के बाद चीन ने ZTQ टाइप-15 टैंक तैनात किए हैं। इंडियन आर्मी ने 200 टी-72 टैंकों को तैनात किया है। हालांकि, यह टैंक जोरावर के मुकाबले भारी हैं। DRDO चीफ ने कहा- रिकॉर्ड टाइम में तैयार किया जोरावर
DRDO चीफ कामथ ने कहा हम सभी के लिए लाइट टैंक को एक्शन में देखना वाकई एक महत्वपूर्ण दिन है। हमने मिसाल कायम की है। ढाई साल की से कम समय में हमने न केवल 25 टन वजनी लाइट टैंक डिजाइन किया बल्कि उसका पहला प्रोटोटाइप भी बनाया और उसकी टेस्टिंग भी की है। उन्होंने आगे कहा कि अब पहला प्रोटोटाइप अगले 6 महीनों में डेवलपमेंट टेस्टिंग से गुजरेगा। इसके बाद हम सेना को पेश करने के लिए तैयार होंगे। जोरावर को सभी परीक्षणों के बाद साल 2027 तक भारतीय सेना में शामिल किए जाने की उम्मीद है। वहीं, LT के एग्जिक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट अरुण रामचंदानी ने कहा कि आज LT के लिए बहुत बड़ा दिन है। दो साल के भीतर हम टैंक को उस स्तर पर ले आए हैं जहां इसे इंटरनल टेस्टिंग के लिए और बहुत जल्द यूजर टेस्टिंग के लिए ले जाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि DRDO और LT का संयुक्त प्रयास है। दोनों टीमों के लिए ये बड़ी उपलब्धि है। दुनिया में कहीं भी इतने कम समय में कोई नया प्रोडक्ट तैनात नहीं किया गया है। जोरावर टैंक से जुड़ी 2 तस्वीरें… तीन तरह के टैंक होते हैं, सबकी अलग-अलग भूमिका- DRDO टैंक लैब डायरेक्टर
DRDO टैंक लैब के निदेशक राजेश कुमार ने कहा कि आम तौर पर तीन अलग-अलग प्रकार के टैंक होते हैं। वजन के आधार पर तीन श्रेणियां होती हैं। भारी टैंक, मध्यम टैंक और हल्के टैंक। कुमार ने आगे कहा कि हर टैंक अपनी भूमिका होती है। एक सुरक्षा के लिए होता है, एक आक्रमण के लिए होता है और ये हल्के टैंक दोनों के लिए मिश्रित भूमिका निभाते हैं। इसलिए दुनिया में कई प्लेयर (देश) हल्के टैंक बना रहे हैं, जिनमें पश्चिमी टैंक हैं, रूसी टैंक हैं, चीनी टैंक हैं। उन्होंने आगे कहा कि जोरावर की अनोखी बात इसका वजन है जो 25 टन है। साथ ही जोरावर टैंक की बेसिक बातों को पूरा करता है। इसमें पावर है, तेजी है और सेफ्टी है। जोरावर में सभी पैरामीटर मिल रहे हैं। अगले 12-18 महीने में सभी टेस्ट पूरे होने की उम्मीद
उम्मीद जताई जा रही है कि अगले 12-18 महीने के भीतर जोरावर से जुड़े सभी टेस्ट पूरे कर लिए जाएंगे। सेना को सौंपे जाने के बाद 25 टन वाले इन टैंक को इंडियन एयरफोर्स के C-17 ग्लोबमास्टर के जरिए तैनाती वाली जगहों पर ले जाया जाएगा। एक बार में 2 टैंक ले जाए जा सकेंगे। हल्का होने के कारण जोरावर पहाड़ी इलाकों में बहुत तेजी से चल सकती है। अभी टी-72, टी-90 टैंक पहाड़ी इलाकों में तैनात हैं, जिनकी जगह जोरावर लेगा। यह खबर भी पढ़ें…
भारत ने बनाया सबसे खतरनाक विस्फोटक, ब्रह्मोस मिसाइल में लगे विस्फोटक से भी ज्यादा विनाशकारी है सेबेक्स-2 भारत ने एक ऐसा विस्फोटक बनाया है जो दुनिया के सबसे शक्तिशाली गैर परमाणु विस्फोटकों में से एक है। इसका नाम है सेबेक्स-2। भारत में निर्मित सेबेक्स-2 का भारतीय नौसेना ने सफलतापूर्वक परीक्षण भी कर लिया है। सेबेक्स-2, ब्रह्मोस मिसाइल में लगे विस्फोटक से भी ज्यादा खतरनाक है। आखिर कितना शक्तिशाली है सेबेक्स-2? भारत के अलावा किन देशों के पास शक्तिशाली गैर-परमाणु विस्फोटक है और मेक-इन-इंडिया के तहत भारत दूसरे कौन से विस्फोटक बना रहा है। पूरी खबर पढ़ें… 5 हजार KM रेंज वाली अग्नि-5 मिसाइल का सफल परीक्षण, एक साथ कई टारगेट पर निशाना लगा सकती है भारत ने अपनी पहली इंटर कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-5 का सफल परीक्षण कर लिया है। इसकी रेंज 5000 किमी है। यह मल्टिपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेबल री-एंट्री व्हीकल (MIRV) टेक्नोलॉजी से लैस है। यानी इसे एक साथ कई टारगेट्स पर लॉन्च किया जा सकता है। इसका पहला परीक्षण अप्रैल 2012 में हुआ था, जबकि सोमवार का परीक्षण MIRV के साथ हुआ। पूरी खबर पढ़ें…


Source link

Check Also

100 Young People Donated Blood For Thalassemia Patients. – Chandigarh News

{“_id”:”6a5fc79f2bc33728e30e281f”,”slug”:”100-young-people-donated-blood-for-thalassemia-patients-chandigarh-news-c-16-1-pkl1017-1076690-2026-07-22″,”type”:”story”,”status”:”publish”,”title_hn”:”Chandigarh News: थैलेसीमिक के मरीजों के लिए 100 युवाओं ने किया रक्तदान”,”category”:{“title”:”City & states”,”title_hn”:”शहर और …