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दावा-BJP ने 25 विदेशी पार्टियों को लोकसभा चुनाव देखने बुलाया:ये भाजपा की कैंपेन रणनीति समझेंगे, इनमें अमेरिका-PAK के दल नहीं



भारत में 19 अप्रैल से शुरू हो रहे लोकसभा चुनाव के बीच BJP पार्टी ने दुनियाभर से 25 राजनीतिक दलों को न्योता दिया है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इसका मकसद विदेशी पार्टियों को भारत के चुनाव की प्रक्रिया और BJP की कैंपेन स्ट्रैटजी समझाना है। बीजेपी ने पार्टी चीफ जेपी नड्डा की तरफ से शुरू की गई ‘KNOW BJP’ पहल के तहत यह कदम उठाया है। जिन विदेशी दलों को न्योता मिला है उनमें ब्रिटेन की कंजर्वेटिव और लेबर पार्टियां, जर्मनी की क्रिश्चियन डेमोक्रेट्स और सोशल डेमोक्रेट्स पार्टी, बांग्लादेश की अवामी लीग पार्टी और नेपाल-श्रीलंका के प्रमुख राजनीतिक दल शामिल हैं। 13 विदेशी दलों ने न्योता स्वीकार किया
रिपोर्ट के मुताबिक, BJP के न्योते को अब तक 13 राजनीतिक दलों ने स्वीकार भी कर लिया है। इस दौरान BJP ने पाकिस्तान, चीन और अमेरिका की पार्टियों को आमंत्रित नहीं किया है। भाजपा के एक नेता ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “अमेरिका में भी इस साल राष्ट्रपति पद के चुनाव होने हैं। ऐसे में डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन पार्टी इसमें व्यस्त हैं। इसके अलावा अमेरिका का लोकतांत्रिक ढांचा भारत से बेहद अलग है। इसी को ध्यान में रखते हुए अमेरिका को न्योता नहीं दिया गया है।” मोदी-शाह की रैलियों में भी शामिल हो सकते हैं विदेशी पार्टी के नेता
वहीं बांग्लादेश में विपक्षी पार्टी BNP की तरफ से शुरू किए गए ‘इंडिया आउट’ कैंपेन की वजह से सिर्फ PM शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग को भारत बुलाया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, विदेशी पार्टियों के प्रतिनिधि मई में लोकसभा चुनाव के तीसरे-चौथे फेज के दौरान भारत आ सकते हैं। इस दौरान उन्हें राजधानी दिल्ली में भारत की चुनाव प्रक्रिया, राजनीतिक ढांचे और BJP के बारे में बताया जाएगा। इसके बाद 5-6 ऑब्जर्वर को लेकर एक ग्रुप बनेगा। इन्हें अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में पार्टी नेताओं से मिलवाया जाएगा। साथ ही ये टॉप BJP लीडर्स जैसे PM मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी चीफ नड्डा की रैलियों में भी शामिल हो सकते हैं। अमेरिका-जर्मनी ने कहा था- भारत में निष्पक्ष चुनाव होने चाहिए
पिछले कुछ समय से अमेरिका और जर्मनी जैसे देश लगातार भारत की चुनाव प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहे हैं। दिल्ली के CM अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद पहले जर्मनी और फिर अमेरिका ने लोकसभा चुनाव पर नजर होनी की बात कही थी। दोनों ही देशों ने उम्मीद जताई थी कि भारत में निष्पक्ष चुनाव को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके अलावा UN भी इस मामले में चिंता जता चुका है। हालांकि, भारत के विदेश मंत्रालय सभी देशों की चिंताओं को खारिज करते हुए उन्हें भारत के मामलों में दखल न देने को कहा था। रिपोर्ट में दावा- भारत के लोकतंत्र में खामियां
इससे पहले ब्रिटिश अखबार द इकोनॉमिस्ट की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि भारत में लोकतंत्र के स्तर में गिरावट आई है। 167 देशों में लोकतंत्र की रैंकिंग को लेकर जारी की गई इस रिपोर्ट में भारत को 41वीं रैंक मिली थी। इसके मुताबिक, भारत में कुछ खामियों के साथ लोकतंत्र मौजूद है। रिपोर्ट में देशों को कैटेगरी में बांटा गया था। पूर्ण लोकतंत्र, खामियों वाला लोकतंत्र और अथॉरिटेरियन रेजीम (जहां एक सिस्टम तानाशाही के रोल में होता है)। चौथी कैटेगरी हाइब्रिड रेजीम की थी, यानी वो देश जहां पूरी तरह से न लोकतंत्र है और न ही तानाशाही। इसमें बांग्लादेश, भूटान और तुर्किये जैसे देशों का नाम था।


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