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ट्रैक, टारगेट और तबाही… आसमान से बरस रहे हजारों ड्रोन्स को लेकर अब सेना की ये है तैयारी – track target and destroy the swarm drones attack

भारतीय सेना के प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने वार्षिक प्रेस कॉन्फ्रेंस 2026 में ड्रोन युद्ध पर बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि भविष्य के युद्ध में ड्रोन बहुत बड़ी भूमिका निभाएंगे. दुश्मन हजारों ड्रोन्स से हमला कर सकता है, लेकिन भारतीय सेना अब तैयार है – ट्रैक (पता लगाना), टारगेट (निशाना बनाना) और तबाही (नष्ट करना) की पूरी रणनीति के साथ.

ड्रोन युद्ध और पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद पर सख्त रुख अपनाया. उन्होंने कहा कि आतंकवादी गतिविधियां कम हुई हैं, लेकिन हम पूरी तरह तैयार हैं. पाकिस्तान अभी भी आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है. हमारी सतर्कता पूरी है और ऑपरेशन सिंदूर जारी है.

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जम्मू-कश्मीर में ड्रोन्स का मामला

सेना प्रमुख ने जम्मू-कश्मीर में हाल ही में देखे गए छोटे ड्रोन्स पर बात की. उन्होंने कहा कि ये बहुत छोटे ड्रोन हैं, जो रक्षात्मक लगते हैं. ये पाकिस्तान के खिलाफ कुछ हो रहा है या नहीं, यह जांचने के लिए लगाए गए थे. आज DGMO स्तर पर पाकिस्तान के साथ बातचीत हुई, जिसमें हमने इन नवीनतम ड्रोन्स का मुद्दा उठाया. सेना प्रमुख ने स्पष्ट कहा कि हमने पाकिस्तान को बताया कि यह बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है.

ड्रोन स्वार्म का खतरा क्या है?

आजकल युद्ध बदल रहा है. यूक्रेन-रूस और अन्य संघर्षों में देखा गया कि सैकड़ों-हजारों छोटे ड्रोन्स एक साथ हमला करते हैं. इन्हें ‘स्वार्म ड्रोन्स’ कहते हैं. ये सस्ते, तेज और मुश्किल से रोकने वाले होते हैं. एक-दो ड्रोन मार देने से स्वार्म रुकता नहीं. ये एक साथ निगरानी करते हैं. हमला करते हैं और तबाही मचाते हैं. सेना प्रमुख ने कहा कि ऐसे हमलों से बचाव के लिए नई तैयारी जरूरी है.

सेना की नई तैयारी: शक्तिबान रेजिमेंट्स

जनरल द्विवेदी के नेतृत्व में भारतीय सेना ने बड़ा कदम उठाया है. 15-20 शक्तिबान रेजिमेंट्स बना रही है. ये रेजिमेंट्स आर्टिलरी के तहत काम करेंगी और विशेष रूप से ड्रोन युद्ध के लिए बनाई गई हैं. इनमें शामिल होंगे…

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  • स्वार्म ड्रोन्स: सैकड़ों ड्रोन्स एक साथ काम करेंगे. ये दुश्मन पर नजर रखेंगे और हमला करेंगे.
  • लॉयटरिंग म्यूनिशन्स (कामिकेज ड्रोन्स): ये ड्रोन घूमते रहते हैं. टारगेट ढूंढते हैं और खुद हमला करके नष्ट हो जाते हैं. 5 किमी से 500 किमी तक मार कर सकते हैं.
  • लॉन्ग-रेंज UAVs: दूर तक निगरानी और हमला करने वाले ड्रोन.

ये रेजिमेंट्स पहले से ही कुछ यूनिट्स में शुरू हो चुकी हैं. यह सेना की बड़ी रिस्ट्रक्चरिंग का हिस्सा है, ताकि आधुनिक युद्ध में तकनीक से जीत हासिल हो.

ट्रैक-टारगेट-तबाही की रणनीति

सेना अब तीन स्टेप में काम करेगी…

  • ट्रैक (Track): एडवांस्ड रडार, सेंसर और AI से दुश्मन के ड्रोन्स का पता लगाना.
  • टारगेट (Target): सटीक निशाना बनाना – जामिंग (सिग्नल ब्लॉक), लेजर या मिसाइल से.
  • तबाही (Destroy): काउंटर-ड्रोन सिस्टम से पूरी तरह नष्ट करना.

सेना स्वदेशी तकनीक पर फोकस कर रही है. 90% गोला-बारूद अब भारत में बन रहा है. ब्रह्मोस, बेहतर ड्रोन्स और लॉयटरिंग म्यूनिशन्स जल्द शामिल होंगे.

क्यों जरूरी है यह तैयारी?

पड़ोसी देश ड्रोन और मिसाइलें बढ़ा रहे हैं. LoC और LAC पर खतरा बढ़ सकता है. सेना प्रमुख ने कहा कि सेना संतुलित और मजबूत तैनाती के साथ तैयार है. आधुनिकीकरण से हम किसी भी चुनौती का मुकाबला करेंगे. यह तैयारी दिखाती है कि भारतीय सेना भविष्य के युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार है – जहां ड्रोन आसमान से बरसें, लेकिन हमारी सेना उन्हें ट्रैक कर, टारगेट बनाकर तबाह कर देगी.

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