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ईडी का एक्शन:रॉयल एस्टेट ग्रुप के प्रमोटर प्रवीण कंसल और नीरज कंसल गिरफ्तार, दिल्ली से पकड़े गए – Royal Estate Group Promoters Praveen Kansal And Neeraj Kansal Arrested By Ed In Delhi

ईडी ने रॉयल एस्टेट ग्रुप के प्रमोटर प्रवीण कंसल और नीरज कंसल को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया है। दोनों को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत चल रही जांच के तहत गिरफ्तार किया गया है।

दोनों पर ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा) की बकाया राशि का भुगतान जानबूझकर नहीं करने और करीब 32.67 करोड़ रुपये के बाउंस चेक जारी करने के आरोप हैं।

ईडी चंडीगढ़ जोनल ऑफिस-1 ने यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा-17 के तहत की। इससे पहले ईडी ने रॉयल एस्टेट ग्रुप, चंडीगढ़ रॉयल सिटी प्रमोटर्स प्राइवेट लिमिटेड (सीआरसीपीएल) और उनसे जुड़े निदेशकों, सीए, अकाउंटेंट्स समेत 20 लोगों के नौ ठिकानों पर छापा मारा था। कार्रवाई के दौरान कई अहम दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन से जुड़े साक्ष्य जब्त किए गए थे।

अधिकारियों के अनुसार यह जांच पंजाब पुलिस की ओर से 19 जुलाई 2025 को दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी। मामला सीआरसीपीएल के निदेशकों व अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश से जुड़ा है। आरोप है कि कंपनी ने गमाडा की बकाया राशि जानबूझकर जमा नहीं करवाई और करोड़ों रुपये के चेक जारी कर दिए, जो बाद में बाउंस हो गए।

18 बैंक खातों की 286 एंट्री जांच के दायरे में

ईडी अब रॉयल एस्टेट ग्रुप और उससे जुड़ी कंपनियों के 18 बैंक खातों की 286 संदिग्ध एंट्री की जांच कर रही है। एजेंसी को आशंका है कि निवेशकों से जुटाई गई रकम को अलग-अलग खातों और संपत्तियों में ट्रांसफर कर मनी ट्रेल छिपाने की कोशिश की गई।



सूत्रों के मुताबिक कई ऐसे वित्तीय लेनदेन सामने आए हैं, जिनमें रकम को दूसरी कंपनियों और प्रोजेक्ट्स में खपाने के संकेत मिले हैं। जांच अब केवल वित्तीय लेनदेन तक सीमित नहीं रही। ईडी ने गमाडा से पिछले पांच वर्षों में जारी सभी चेंज ऑफ लैंड यूज (सीएलयू) मामलों का रिकॉर्ड भी तलब कर लिया है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि किन परियोजनाओं को नियमों को दरकिनार कर मंजूरी दी गई और इससे सरकार को कितना वित्तीय नुकसान हुआ।

सनटेक और अल्टस प्रोजेक्ट भी रडार पर

ईडी की मौजूदा जांच रॉयल एस्टेट ग्रुप के अलावा सनटेक सिटी और अल्टस स्पेस बिल्डर्स से जुड़े मामलों तक पहुंच चुकी है। आरोप हैं कि कुछ परियोजनाओं में फर्जी दस्तावेजों और कथित गलत सहमति पत्रों के आधार पर सीएलयू हासिल किए गए। हाल ही में ईडी ने कई ठिकानों पर छापे के दौरान नकदी, संपत्ति से जुड़े दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड भी बरामद किए थे। सूत्रों के अनुसार आने वाले दिनों में कई और बड़े बिल्डरों, हाउसिंग ग्रुप्स और उनसे जुड़े लोगों पर कार्रवाई हो सकती है।


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