भारतीय निर्यातक अमेरिका में बहुत अधिक आयात शुल्क का सामना कर रहे प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में नए अमेरिकी टैरिफ से निपटने के लिए कहीं बेहतर स्थिति में हैं। शनिवार को सूत्रों ने यह बात कही। सूत्रों ने कहा कि अमेरिका के रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने से प्रभावित होने वाले झींगा जैसे सेक्टर्स को निर्यात बढ़ाने के लिए यूरोपीय संघ जैसे नए बाजारों की तलाश करनी होगी। सूत्रों ने कहा, “भारत अमेरिका की तरफ से दो अप्रैल से लगाए गए जवाबी सीमा शुल्क पर विजेता के रूप में उभरा है।”
भारत निवेश आकर्षित करके, उत्पादन बढ़ाकर और अमेरिका को निर्यात बढ़ाकर इसका लाभ उठा सकता है। सेमीकंडक्टर सेक्टर से जुड़े मौके भुनाने के लिए हमें इंफ्रास्ट्रक्चर और पॉलिसी सपोर्ट पर ध्यान देना होगा। अवसरों का पूरी तरह फायदा उठाने के लिए भारत को ईज ऑफ डूइंग बिजनसेज को बढ़ाना होगा। लॉजिस्टिक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर में इन्वेस्ट करना होगा। साथ ही नीतिगत स्थिरता बनाए रखनी होगी।
भारत बेहतर स्थिति में है
उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत जारी होने से भारत मौजूदा हालात से निपटने के लिए कहीं बेहतर स्थिति में है। दो अप्रैल से अमेरिका ने भारत पर अतिरिक्त 26 फीसदी आयात शुल्क लगाया है। जबकि वियतनाम को 46 प्रतिशत, चीन को 34 प्रतिशत, इंडोनेशिया को 32 प्रतिशत और थाईलैंड को 36 प्रतिशत सीमा शुल्क का सामना करना पड़ रहा है। सूत्रों ने यह भी कहा कि वाणिज्य मंत्रालय इन शुल्कों के बारे में घरेलू निर्यातकों से संपर्क कर रहा है। निर्यातकों को सहायता उपायों का विस्तार करने के लिए निर्यात संवर्धन मिशन तैयार करने का काम प्रगति पर है।
यूएस-चीन ट्रेड वॉर से होगा फायदा
उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने सभी मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) में अपने डेयरी सेक्टर का बचाव किया है और वह आगे भी ऐसा करना जारी रखेगा। इसके साथ ही अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर से भारतीय निर्यातकों को अपनी निर्यात खेप बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। उन्होंने कहा, “सरकार ऐसी स्थिति में माल की डंपिंग की किसी भी आशंका से घरेलू उद्योग की रक्षा करने के लिए मौजूद है।”
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