नई दिल्ली2 मिनट पहले
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AI जनरेटेड तस्वीर।
सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को भारतीय सेना की शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) की कई महिला वायुसेना अधिकारियों को परमानेंट कमीशन न देने के खिलाफ दाखिल याचिकाओं की सुनवाई की।
सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस उज्ज्वल भूयान और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने कहा- हर ड्यूटी महत्वपूर्ण होती है, जमीन पर हो या हवा में, देश को आपकी सेवाओं पर गर्व है।
विंग कमांडर सुचेता एडन और अन्य की याचिका में कहा गया है कि मानदंड बदलकर महिलाओं के साथ भेदभाव किया गया। उन्हें परमानेंट कमीशन नहीं दिया गया, जो संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता) का उल्लंघन है।
आरोप है कि 2019 की मानव संसाधन नीति के बाद कई महिला अधिकारियों के मामलों को श्रेणीबद्ध नहीं किया गया क्योंकि वे प्रेग्नेंट थीं या मैटरनिटी लीव पर थीं, जबकि उनके सीजीपीए अंक योग्य थे।
दलील दी गई कि सुप्रीम कोर्ट के कई फैसले साफ कहते हैं कि गर्भावस्था के आधार पर किसी महिला से भेदभाव नहीं किया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट में एक महिला अधिकारी ने कहा कि हमारी जिम्मेदारियों को कमतर आंका गया है। मामले में अंतिम सुनवाई 9 दिसंबर को होगी।
विंग कमांडर निकिता पांडे का मामला
22 मई को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और इंडियन एयर फोर्स को निर्देश दिया था कि विंग कमांडर निकिता पांडे को सेवा से न निकाला जाए। पांडे ऑपरेशन बालाकोट और ऑपरेशन सिंदूर में भी शामिल थीं। पांडे ने एयरफोर्स पर परमानेंट कमीशन देने में भेदभाव का आरोप लगाया है।
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सुप्रीम कोर्ट बोला- सेना की परमानेंट कमीशन पॉलिसी में खामियां, केंद्र सरकार ने कहा- महिला अफसरों के साथ भेदभाव नहीं
सुप्रीम कोर्ट में अक्टूबर में भारतीय सेना की शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) की 13 महिला अफसरों के आरोपों पर सुनवाई की थी। कोर्ट ने कहा था कि परमानेंट कमीशन पॉलिसी में कुछ खामियां हैं। जैसे किसी बैच में 80 अंक पाने वाला अफसर बनता है तो दूसरे बैच में 65 अंक पाने वाले को भी मौका मिल सकता है। पूरी खबर पढ़ें…
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