भारतीय किसान यूनियन (चदूनी) के नेता गुरनाम सिंह चदूनी ने सुप्रीम कोर्ट में किसानों की ओर से रास्ता ब्लॉक किए जाने की बहस पर कहा कि रास्ता पुलिस ने रोका है. वहीं, सरकार ने किसानों पर पानी की बौछार कराई है और आंसू गैस के गोले छोड़े हैं.

नई दिल्ली: Farmers’ Protests: कृषि कानूनों (Farm Laws) के खिलाफ शुरू हुए आंदोलन का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में पहुंच चुका है. सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को फिर इस मुद्दे पर सुनवाई हुई है. कोर्ट ने कहा है कि वो किसानों के राइट टू प्रोटेस्ट को स्वीकार करता है लेकिन उसका मानना है कि इस मामले का जल्द समाधान निकलना चाहिए ताकि इससे दूसरे नागिरकों के अधिकारों का उल्लंघन न हो. सुनवाई के बाद किसान संगठनों ने फिर इस बात पर जोर दिया है कि वो इन कानूनों को वापस कराकर ही जाएंगे.
प्रदर्शन कर रहे 32 किसान संगठनों में से एक भारतीय किसान यूनियन (चदूनी) के नेता गुरनाम सिंह चदूनी ने रास्ता बंद करने को लेकर हुई बहस पर कहा कि ‘पुलिस ने रास्ता रोका है. हमने तो नहीं रोका. सरकार ने बैरीकेड लगाए. हम पर पानी की बौछार की. आंसू गैस के गोले छोड़े. हम तो दिल्ली जाकर प्रदर्शन करना चाहते थे. रामलीला मैदान जाना चाहते थे. हम पर मुकदमे भी दर्ज किए गए.’
सुप्रीम कोर्ट में वकील हरीश साल्वे ने कहा था कि किसान दिल्ली को ब्लॉक करके बैठे हैं, जिससे बहुत सी मुश्किलों आ रही हैं. कोर्ट ने कहा था कि ‘रास्ता किसने बंद कर रखा है?’ कोर्ट ने यह भी कहा है कि ‘हमें यह नहीं पता कि रामलीला मैदान में जाने पर भी प्रदर्शनकारी शांत रहेंगे या नहीं.’
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को फिर कृषि कानूनों पर समाधान निकालने के लिए कृषि समिति की बात की. कोर्ट ने केंद्र से भरोसा मांगा कि ‘क्या वो बातचीत जारी रहने तक अपने कानूनों को होल्ड करेगा?’ इस पर अटॉर्नी जनरल ने कहा है कि वो सरकार से इसपर निर्देश लेंगे.
इसपर गुरनाम सिंह चदूनी ने कहा कि ‘सरकार इस पर तैयार हो न हो हम तीनों कानून रद्द कराए बिना वापस नहीं जाएंगे. चाहे सरकार ये कानून कुछ दिन रोके या न रोके हम आंदोलन जारी रखेंगे.’ उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि सरकार बातचीत नहीं कर रही. उन्होंने कहा, ‘हमारे लोग शहादत दे रहे हैं. हमने कभी बातचीत बंद नहीं की. सरकार हमें बातचीत के लिए बुला नहीं रही. सरकार बुलाएगी तो हम बातचीत के लिए जाएंगे. सुप्रीम कोर्ट की समिति के लिए हम सब मिलकर निर्णय करेंगे.’
बता दें कि किसानों और सरकार के बीच अभी तक पांच चरणों में बात हो चुकी है लेकिन अभी तक कोई हल नहीं निकला है. सरकार ने किसानों को कानूनों में संशोधन का प्रस्ताव दिया था, लेकिन किसानों ने इसे नकार दिया और कानून वापस लेने की मांग दोहराई. सुप्रीम कोर्ट ने भी किसान संगठनों, सरकार और कृषि विशेषज्ञों को मिलाकर समिति का गठन करने का सुझाव दिया है.
News Credit NDTV
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