तय कार्यक्रम के तहत, दोपहर करीब 12 बजे किसानों का जत्था रवाना हुआ तो हरियाणा पुलिस ने किसानों का वहां फूल बरसाकर स्वागत किया और चाय के साथ बिस्किट खिलाए लेकिन दिल्ली कूच पर अड़े किसान जब बैरिकेडिंग पर चढ़ने लगे और आगे जाने पर अड़ गए तो फिर दोनों तरफ से टकराव होने लगा, जो करीब पाैने चार घंटे चला। पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और उन्हें तितर-बितर करने के लिए वाटर कैनन से पानी की बौछार भी की।
इसमें सात किसान घायल हो गए, जिनमें चार की हालत गंभीर है। एक किसान को पीजीआईजी चंडीगढ़ रेफर किया गया है। टकराव के बाद शाम करीब चार बजे किसान नेता सरवण सिंह पंधेर ने जत्थे को वापस बुला लिया। इसके बाद पंधेर ने पत्रकार वार्ता में आरोप लगाया कि पुलिस ने किसानों को रोकने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े, मिर्ची स्प्रे किया और रबड़ की गोलियां भी चलाई, जिससे किसान घायल हुए है।
पंधेर ने कहा, केंद्र सरकार के पास दुनिया का सबसे बड़ा प्रचार तंत्र है, जिसके जरिये किसानों को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। किसानों को देश विरोधी दिखाया जा रहा है। आज जो शंभू बॉर्डर पर किसानों के साथ हुआ, उसे पूरे देश ने देखा है। किसान पैदल जा रहे थे। उनके पास कोई हथियार नहीं था। फिर भी क्यों पुलिस उन्हें रोक रही है।
किसानों की ओर से पहचान पत्र न दिखाए जाने के बारे में पंधेर ने कहा कि जिन 101 किसानों की सूची पंजाब व हरियाणा सरकारों को दी गई थी, वही दिल्ली कूच के लिए गए थे। हरियाणा पुलिस प्रशासन की ओर से किसानों के खिलाफ झूठ फैलाया जा रहा है। जिस तरह का व्यवहार किसानों के साथ किया जा रहा है वह बेहद निंदनीय है।
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