खालिस्तानी आतंकवादी (सांकेतिक तस्वीर)
– फोटो : एएनआई
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सिख्स फॉर जस्टिस ग्रुप 17 नवंबर को न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में खालिस्तान के लिए रेफरेंडम (जनमत संग्रह) का आयोजन करने जा रहा है। रिपोर्ट्स में खुलासा हुआ है कि इस रेफरेंडम के लिए भारत से फंडिंग की जा रही है और इस फंडिंग के पीछे सबसे बड़ा हाथ देश के गैंगस्टर मॉड्यूल का है।
इस बात का खुलासा देश की सबसे बड़ी खुफिया एजेंसी ने किया है। इस रिपोर्ट को गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के साथ भी साझा किया है। रिपोर्ट में बताया है कि देश में फैले अवैध हथियारों, ड्रग्स और हवाला नेटवर्क के जरिए इन खालिस्तानी संगठनों को लगातार फंडिंग की जा रही है। एजेंसी ने रिपोर्ट में बताया है कि खालिस्तानी फंडिंग के लिए आतंकी और गैंगस्टर मॉड्यूल का सहारा लिया जा रहा है।
सिख्स फॉर जस्टिस ग्रुप के प्रेसिडेंट अवतार सिंह पन्नू ने दो नवंबर को ऑकलैंड में रैली की थी जिसमें काफी संख्या में खालिस्तान समर्थक शामिल हुए थे।
मूवमेंट के लिए सोशल मीडिया का सहारा
रेफरेंडम का असर ऑकलैंड और टॉरंगा शहर में ज्यादा देखा जा रहा है। सोशल मीडिया पर भी हैशटैग ऑकलैंड और टॉरंगा टेंड कर रहे हैं। एजेंसियों ने एक्स पर 17 अकाउंट्स को चिन्हित किया है, जो बड़े स्तर पर लोगों को कनेक्ट और अपडेट कर रहे हैं। इन अकाउंट्स की लगातार निगरानी की जा रही है। इन अकाउंट्स पर खालिस्तानी संगठनों, सिख्स फॉर जस्टिस और गुरपतवंत सिंह पन्नून के मैसेज और वीडियो पोस्ट कर अपडेट दी जा रही है।
सात इंटरनेशनल फ्लाइट्स को खतरा
एजेंसी ने रिपोर्ट में बड़ा खुलासा करते हुए 7 इंटरनेशनल फ्लाइट्स पर आतंकी हमले का खतरा बताया है। इन फ्लाइट्स के नंबर व रूट्स भी साझा किए हैं जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने सतर्कता बढ़ा दी है।
फ्लाइट्स का नंबर रूट
एआई-187 और एआई-189 दिल्ली-टोरंटो
एआई-185 दिल्ली-वैंकुवर
एआई-111 और एआई-161 दिल्ली-लंदन
एआई-129 और एआई-131 मुंबई-लंदन
एआई-302 दिल्ली-सिडनी
एआई-308 दिल्ली-मेलबोर्न
एआई-121 दिल्ली-फ्रैंकफर्ट
55 एक्स, एक इंस्टाग्राम और 15 फेसबुक अकाउंट का इस्तेमाल
एजेंसी ने रिपोर्ट में बताया है कि भारत में पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर के अलावा कनाडा, अमेरिका, यूके, हंगरी से सोशल मीडिया पर 55 एक्स अकाउंट, एक इंस्टाग्राम और 15 फेसबुक अकाउंट के जरिए न्यूजीलैंड रेफ्रेंडम के लिए प्रमोशनल एक्टिविटी की जा रही है। एजेंसी ने इस अकाउंट्स की डिटेल्स एमएचए और विदेश मंत्रालय को साझा की है, ताकि रेफ्रेंडम के दौरान न्यूजीलैंड में भी इन अकाउंट्स पर नजर रखी जा सके।
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