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गांधी फैमिली से मिलीं बांग्लादेशी PM शेख हसीना:सोनिया गांधी ने गले लगाकर किया स्वागत; दोनों परिवारों का 5 दशकों का रहा है साथ



बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने आज सोमवार को नई दिल्ली में कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मुलाकात की। मुलाकात के दौरान शेख हसीना और सोनिया गांधी ने एक-दूसरे से गर्मजोशी के साथ गले मिलीं। शेख हसीना ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को भी गले लगाया और उनसे बातचीत की। इससे पहले शेख हसीना ने भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात की थी। वे शनिवार को भारत के पूर्व उप-प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी से भी मिली थीं। बांग्लादेशी PM अपने समकक्ष नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने भारत आई थीं। गांधी परिवार और शेख हसीना के परिवार का रिश्ता करीब 5 दशक से अधिक पुराना है। शेख हसीना के पिता शेख मुजीबुर रहमान का इंदिरा गांधी के साथ दोस्ताना रिश्ता था। शेख मुजीबुर रहमान को बांग्लादेश का जनक कहा जाता है। उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ चले सशस्त्र संघर्ष की अगुवाई करते हुए बांग्लादेश को आजादी दिलाई थी। इस दौरान भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उनकी खूब मदद की थी। साल 1971 में बांग्लादेश आजाद हो गया। बांग्लादेश की आजादी के 4 साल बाद शेख मुजीबुर रहमान की हत्या कर दी गई। इस दौरान शेख हसीना के परिवार को 18 लोग मार डाले गए। पूरा परिवार तबाह हो गया। मरने वालों में शेख हसीना का 10 साल का भाई भी था। जिस वक्त ये घटना हुई, उस वक्त शेख हसीना अपनी बहन और पति के साथ जर्मनी में थीं। उनकी जान पर भी खतरा बना हुआ था। ऐसे वक्त में इंदिरा गांधी ने शेख हसीना और उनकी बहन को राजनीतिक शरण दी। शेख हसीना दिल्ली के पंडारा रोड में 6 सालों तक दुनिया से छुपी रहीं। 1981 में शेख हसीना ने भारत छोड़कर वापिस बांग्लादेश चली गईं। साल 2022 में चार दिवसीय यात्रा पर दिल्ली आईं शेख हसीना ने भारत को एक ‘सच्चा दोस्त’ बताया था। शेख हसीना ने न्यूज एजेंसी ANI को दिए एक इंटरव्यू में बताया था कि इस हादसे से बस 15 दिन पहले ही उन्होंने बांग्लादेश छोड़ा था। वह अपनी अपने न्यूक्लियर साइंटिस्ट पति के पास जर्मनी गई थी। उन्हें वहां अपनी PhD रिसर्च पूरी करनी थी। शेख हसीना ने कहा कि जिस दिन ये हादसा हुआ उनके पिता, मां, तीन भाई, दो नई नवेली भाभियां, चाचा और अन्य रिश्तेदार जो भी उन्हें सिर्फ 15 दिन पहले एयरपोर्ट पर छोड़ने गए थे, वे सब मारे गए। शेख हसीना ने कहा कि ऐसे बुरे वक्त में इंदिरा गांधी ने उनकी बहुत मदद की थी। उन्होंने मेरे पति को नौकरी दिलाई। हमें रहने के लिए सुरक्षित घर दिलाया। मैं ये अहसान हमेशा याद रखूंगी।


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