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क्या नर्सों की कमी से जूझ रही है महाराष्ट्र सरकार की नई कोरोना मुहिम?

क्या नर्सों की कमी से जूझ रही है महाराष्ट्र सरकार की नई कोरोना मुहिम?

महाराष्ट्र (Maharashtra) में कोरोना के बढ़ते मामलों (Coronavirus Cases) की रोकथाम के लिए हाल ही में राज्य सरकार ने एक मुहिम शुरू की लेकिन इस मुहिम को आगे बढ़ाने के लिए नज़रें अस्पतालों के नर्सिंग स्टाफ़ पर हैं.

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मुंबई: महाराष्ट्र (Maharashtra) में कोरोना के बढ़ते मामलों (Coronavirus Cases) की रोकथाम के लिए हाल ही में राज्य सरकार ने एक मुहिम शुरू की लेकिन इस मुहिम को आगे बढ़ाने के लिए नज़रें अस्पतालों के नर्सिंग स्टाफ़ पर हैं. पहले से ही स्टाफ़ की कमी झेल रहे अस्पताल इसके ख़िलाफ़ हैं. नर्सिंग एसोसिएशन ने भी नाराज़गी ज़ाहिर की है.

मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने मुहिम की शुरुआत करते हुए कहा था, ‘माझे कुटुम्ब माझी ज़िम्मेदारी’, यानी मेरा परिवार, मेरी ज़िम्मेदारी. 15 सितम्बर से एक महीने तक ये मुहिम चलेगी. 12 लाख पार मामलों के साथ कोरोना ग्राफ़ में सबसे ऊपर चल रहे महाराष्ट्र में क़रीब दस दिन पहले इस मुहिम की घोषणा हुई है जिसमें घर घर कोरोना जांच का लक्ष्य है. पर क्या इसके लिए सरकार-प्रशासन के पास पर्याप्त स्टाफ़ है? ये सवाल इसलिए क्योंकि रायगढ़ ज़िले के पेण के डाक्टरों ने ज़िलाधिकारी को लिखे अपने खत में नर्सों को भेजने में अपनी बेबसी बयां की है, क्योंकि राज्य के अस्पताल पहले से नर्सिंग स्टाफ़ की कमी झेल रहे हैं.

आईएमए, महाराष्ट्र के डॉक्टर अविनाश भोंडवे ने कहा, ‘हाल ही में ऐसा हुआ है की पेण में मुंबई के नज़दीक का एक गांव है, वहां पर जो निजी अस्पताल में नर्सेस काम करती हैं उनको बुलाया गया है. और उनको नोटिस दिया गया कि आपको इसमें काम करना चाहिए. अगर काम नहीं किया तो नोटिस दिया है कि क़ानूनी कार्रवाई होगी. बात ऐसी है कि नर्सेस ख़ुद काम नहीं करना चाहतीं, अगर वो अस्पताल में काम नहीं करेंगी तो अस्पताल का काम बंद होगा और इन्हें सरकार के कार्यक्रम में भेजा तो उनका कहना है हम नौकरी छोड़ देंगे. हमारे लिए दिक़्क़त है, भेजेंगे तब भी प्रॉब्लम नहीं भेजें तब भी दिक़्क़त.’

अपनी पहचान छुपाते हुए एक नर्स ने अपनी बेबसी बयां की. नर्सिंग एसोसिएशन ख़फ़ा है क्योंकि मुहिम शुरू करने से पहले उनसे कोई चर्चा नहीं की गयी. वहीं राज्य की सत्ता में शामिल मुंबई से कांग्रेस पार्षद कहते हैं, ‘समाजसेवियों को इस स्वास्थ्य कैंपेन से 100-100 रुपये में जोड़ा गया है जो काफ़ी नहीं.’

एक आंकड़े के मुताबिक़ राज्य में क़रीब 50,000 नर्सेस निजी अस्पतालों में काम करती हैं और 52,000 सरकारी अस्पतालों में. महामारी के ख़ौफ़ और बढ़ते मरीज़ों की संख्या के बीच अस्पताल पहले से नर्सिंग स्टाफ़ की कमी की शिकायत कर रहे हैं. ऐसे में जनसंख्या के हिसाब से दूसरे सबसे बड़े राज्य के घर-घर में कोरोना जांच का लक्ष्य कितना सफल हो पाएगा कहना मुश्किल है.

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